Gooseberries — Anton Chekhov

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आकाश, धूसर और बादलों से भरा, बारिश की धमकी दे रहा था, लेकिन इवान इवानिच और बर्किन आगे बढ़ते रहे, उनके जूते कीचड़ भरे रास्ते में धँसते जा रहे थे। इवान ने नम हवा में गहरी साँस लेते हुए कहा, "अच्छे मौसम में यूँ ही भटकना कितना शानदार होता है।" बर्किन, जो अधिक व्यावहारिक व्यक्ति थे, ने केवल सिर हिलाया, और गहराते बादलों को भौंहें सिकोड़ कर देखा। साहित्यिक तथ्य: यह शुरुआती अंश इवान और बर्किन के बीच की दोस्ती और रूसी साहित्य में आम वायुमंडलीय सेटिंग को स्थापित करता है। 'लक्ष्यहीन भटकना' इवान के चिंतनशील स्वभाव की ओर इशारा करता है।

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अचानक हुई तेज़ बारिश ने उन्हें आश्रय के लिए भागने पर मजबूर कर दिया, और उन्हें एक पुरानी चक्की की टपकती हुई छत के नीचे पनाह मिली। "बुर्किन, इंसानों की एक प्रवृत्ति होती है, कि वे किसी एक चीज़ पर अटक जाते हैं," इवान ने अपनी लंबी कोट से पानी झाड़ते हुए कहना शुरू किया। "मेरे भाई, निकोलाई इवानिच ने अपना पूरा जीवन एक ही विचार का पीछा करते हुए बिताया, जैसे एक कुत्ता अपनी ही पूंछ का पीछा करता है। वह एक छोटी सी जागीर के अलावा कुछ नहीं चाहते थे, जिसमें करौंदे की झाड़ियाँ हों।" इवान रुका, उसके चेहरे पर एक उदास भाव छा गया, "जैसा कि रोमन दार्शनिक सेनेका ने एक बार लिखा था, 'ऐसा नहीं है कि चीजें मुश्किल हैं इसलिए हम हिम्मत नहीं करते; बल्कि इसलिए कि हम हिम्मत नहीं करते इसलिए वे मुश्किल हैं।' निकोलाई ने हिम्मत की, लेकिन गलत कारणों से।"

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"बीस साल तक, उसने एक मामूली सरकारी क्लर्क के रूप में काम किया, एक ऐसा जीवन जिसमें कोई खुशी नहीं थी, केवल अपनी काल्पनिक संपत्ति के लिए हर कोपेक बचाने के लिए जी रहा था," इवान ने हाथ से इशारा करते हुए कहा। "उसे केवल करौंदे दिखाई देते थे, अपने कार्यालय की अंतहीन भूरी दीवारें नहीं। उसकी महत्वाकांक्षा ने उसे पूरी तरह से घेर लिया था, हर विचार, हर बलिदान को आकार दे रही थी।" बुर्किन ने सुना, उसकी नज़र मिल के पास बहती धारा पर टिकी हुई थी। साहित्यिक तथ्य: यह पृष्ठ निकोलाई के शुरुआती जीवन को दर्शाता है, जिसमें उसकी विनम्र, नीरस वास्तविकता और उसके भव्य, उपभोग करने वाले सपने के बीच तीव्र विरोधाभास दिखाया गया है। उच्च कोण कठोर नौकरशाही के भीतर उसकी नगण्यता पर जोर देता है।

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"अपने लक्ष्य को तेज़ी से पाने के लिए, उसने एक बूढ़ी, सादी विधवा से शादी की, प्यार के लिए नहीं, बल्कि उसकी दौलत के लिए," इवान ने कड़वाहट से भरी आवाज़ में सुनाया। "उसने उसे भूखा रखा, उसके पैसे ताले में बंद कर दिए, उसका जीवन दुखमय बना दिया। वह जानता था कि वह क्या कर रहा है, फिर भी उसने अपने पवित्र करौंदे के पौधों के लिए इसे सही ठहराया।" बुर्किन असहज होकर हिल गया, इवान की तीव्र नज़र से बचते हुए। साहित्यिक तथ्य: यह दृश्य निकोलाई की महत्वाकांक्षा की नैतिक कीमत को उजागर करता है। उसका विवाह, लालच से प्रेरित, एक विलक्षण, भौतिक जुनून के अमानवीय प्रभाव को दर्शाता है, जो स्वार्थी pursuits की कहानी की आलोचना को दर्शाता है।

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"वह जल्द ही बीमार पड़ गई और चल बसी, उसकी आत्मा उसकी अथक कंजूसी से कुचल गई थी," इवान ने कहा, उसके जबड़े पर एक कठोर भाव था। "उसकी मौत निकोलाई के लिए सिर्फ एक सीढ़ी थी, जिससे वह अब उसके पास मौजूद धन के साथ अपनी परम खुशी का पीछा करने के लिए स्वतंत्र हो गया।" बारिश रुक गई थी, और एक ठंडी हवा उनके चारों ओर पत्तों को सरसरा रही थी, जो इवान की कहानी की उदासी को प्रतिध्वनित कर रही थी। साहित्यिक तथ्य: विधवा की मृत्यु निकोलाई की ठंडी महत्वाकांक्षा की परिणति को दर्शाती है। यह विवरण उसके एकतरफा लक्ष्य में निहित नैतिक पतन को रेखांकित करता है, जहाँ मानव जीवन एक साधन मात्र बन जाता है।

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"और इस तरह, उसने आखिरकार अपनी जागीर खरीद ली, एक छोटी, बल्कि साधारण सी जगह, जिसमें वो करौंदे की झाड़ियाँ थीं जिनकी उसे बहुत इच्छा थी," इवान ने सुनाया, उसकी आवाज़ अब नीरस थी। "वह खुद को एक ज़मींदार, एक प्रतिष्ठित व्यक्ति मानता था, उन साधनों के बावजूद जिनका उसने इसे हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया था। उसकी खुशी पूर्ण थी, किसी भी अपराधबोध या पछतावे की भावना से रहित।" इवान ने खुले आसमान की ओर इशारा किया, मानो निकोलाई के नए साम्राज्य की ओर इशारा कर रहा हो। साहित्यिक तथ्य: यह पृष्ठ निकोलाई की 'सफलता', उसकी जागीर के अधिग्रहण को दर्शाता है। उसके गर्वपूर्ण व्यवहार और संपत्ति के 'साधारण' स्वरूप के बीच का दृश्य विरोधाभास उसकी उपलब्धि की सतहीता का संकेत देता है।

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इवान ने अपने भाई की जागीर की अपनी यात्रा का वर्णन किया। "वहाँ वह था, फूला हुआ और आत्मसंतुष्ट, चाय डाल रहा था और अपने नए जीवन की डींगें मार रहा था। और फिर, पेलागेया, उसकी नौकरानी, ​​एक प्लेट में करौंदे लाई, एक खट्टा, कठोर व्यंजन जिसे देखकर ही मेरे दाँत दर्द करने लगे।" निकोलाई ने, एक चमकती मुस्कान के साथ, एक अपने मुँह में डाला। "उसने उन्हें खाया और उन्हें स्वादिष्ट घोषित किया! 'इन्हें चखो, भाई!' उसने आग्रह किया, उसकी आँखें शुद्ध आनंद से चमक रही थीं।" साहित्यिक तथ्य: यह निकोलाई के व्यक्तिगत आख्यान का चरमोत्कर्ष है, वह क्षण जब वह अपने जीवन की महत्वाकांक्षा का स्वाद लेता है। करौंदे, अब 'चखे गए', उसके सपने की पूर्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इसकी सच्ची, खट्टी प्रकृति को प्रकट करते हैं (चेखव की बंदूक का परिणाम)।

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"वह इतना खुश था, अपनी खुशी को लेकर इतना आश्वस्त था," इवान ने पीड़ा में अपनी आवाज़ उठाते हुए कहा। "लेकिन उसकी खुशी एक भ्रम थी, जो स्वार्थ से पैदा हुई थी और दूसरों की कब्रों पर बनी थी। यही तो भयावहता है, बुर्किन, एक आदमी को अपनी छोटी, कृत्रिम दुनिया में इतना संतुष्ट देखना जबकि बाहर की दुनिया पीड़ा से कराह रही है।" इवान ने अपनी छड़ी कसकर पकड़ी, उसकी उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए। साहित्यिक तथ्य: इवान का यह भावुक उद्गार कहानी के मुख्य विषय को उजागर करता है: जब व्यक्तिगत खुशी सामूहिक पीड़ा को अनदेखा करती है तो उसका नैतिक खतरा। उसकी निराशा निकोलाई की आत्म-संतुष्टि की सीधी प्रतिक्रिया है।

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"आत्मसंतुष्ट मत बनो, बुर्किन! जब हम यहाँ बैठकर चाय पी रहे हैं, तब कितने ही लोग भूखे हैं, बीमार हैं, चुपचाप कष्ट सह रहे हैं। सच्चा सुख तब तक असंभव है जब तक अन्याय मौजूद है," इवान ने हताश तत्परता से आगे झुकते हुए विनती की। "हमें ज़रूरतमंदों की पुकारों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, बल्कि भलाई करनी चाहिए!" उसने बुर्किन की ओर देखा, उसकी आँखें चौड़ी और गंभीर थीं, समझ की माँग कर रही थीं। साहित्यिक तथ्य: यह पृष्ठ इवान का नैतिक आदेश है, कार्रवाई और सहानुभूति के लिए एक सीधा आह्वान। यह कहानी के मानवीय संदेश को रेखांकित करता है, निकोलाई की आलोचना से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी के लिए एक आह्वान करता है।

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इवान ने अपनी कहानी खत्म की, लेकिन बुर्किन को उसका गहरा संदेश समझ नहीं आया। "यह एक अच्छी कहानी है, इवान इवानिच," वह बुदबुदाया, जम्हाई रोकते हुए, पहले से ही सोने के बारे में सोच रहा था। इसके बाद की खामोशी इवान की अनकही निराशा से भरी थी, एक कठोर एहसास कि सच्चाई के लिए सबसे भावुक अपील भी अनसुनी रह सकती है। साहित्यिक तथ्य: अंतिम पृष्ठ कहानी के बुर्किन पर पड़े स्थायी प्रभाव, या उसकी कमी को दर्शाता है। इवान की निराशा एक ऐसी दुनिया में नैतिक चेतना को जगाने की कठिनाई को दर्शाती है जो आत्मसंतुष्टि के प्रति प्रवृत्त है, जिससे गहरे, अनसुलझे नैतिक प्रश्नों की स्थायी छाप छूट जाती है।