Little Red Riding Hood

दुनिया के छोर पर स्थित जमी हुई टुंड्रा में, एलाना रहती थी, जो एक युवा शिकारी की बेटी थी, और उसकी दादी, जो गाँव की एक बुद्धिमान महिला थी। लेकिन टुंड्रा में सिर्फ बर्फ और हिमपात ही नहीं था। जंगल के किनारों पर एक परछाई मंडरा रही थी, एक विशाल और चालाक भेड़िया जिसका नाम वोरलाग था, जिसकी भूख अंतहीन सर्दी के बराबर थी। एलाना का अपनी दादी के लिए प्यार और वोरलाग की भूख टुंड्रा को हमेशा के लिए बदल देगी।

"एलारा, यह गर्म लबादा अपनी दादी को दे आओ," उसकी माँ ने उसे गहरा लाल वस्त्र देते हुए कहा। "लेकिन जंगल के रास्ते से सावधान रहना। सर्दियों ने उसे खतरनाक बना दिया है।" एलारा ने लबादे को कसकर पकड़ लिया, उसकी ऊन दस्ताने पहने हाथों पर नरम लग रही थी। "मैं रास्ता जानती हूँ, माँ। मैं उस पर सौ बार चल चुकी हूँ।" उसकी माँ ने आह भरी, चिंता उसके चेहरे पर छपी थी। "बस याद रखना, जंगल में पेड़ों से कहीं ज़्यादा कुछ है।"

जैसे ही एलारा जंगल में दाखिल हुई, हवा चीड़ के पेड़ों से फुसफुसाती आवाज़ों की तरह गुज़र रही थी। एक कौवा ऊपर एक डाल पर उतरा, उसकी काली आँखें चमक रही थीं। "तुम क्या चाहते हो?" एलारा ने पूछा, हालाँकि वह जानती थी कि कौवा जवाब नहीं देगा। जंगल हमेशा जीवित महसूस होता था, देखता हुआ, इंतज़ार करता हुआ।

एक गहरी आवाज़ ने सन्नाटा तोड़ा। "खो गए, छोटे बच्चे?" एक विशाल भूरा भेड़िया, वोरलाग, पेड़ों से निकला, उसकी साँस ठंडी हवा में भाप बन रही थी। उसने अपना सिर नीचे किया। "यूनानी कहानीकार ईसप ने एक बार कहा था, 'भेड़ की खाल में भेड़िये से सावधान रहो।' मैं भेड़ नहीं हूँ, बच्चे, केवल एक अकेला शिकारी हूँ।" एलारा जम गई, उसका हाथ सहज रूप से उसकी कमर पर रखी छोटी चाकू तक पहुँच गया।

"मैं तुम्हारी दादी के घर का रास्ता जानता हूँ," वोरलाग गरजा। "मैं तुम्हें एक छोटा रास्ता दिखा सकता हूँ, एक ऐसा रास्ता जो सुंदर फूलों से भरा है। टुंड्रा गुलाब पूरी तरह खिले हुए हैं।"

वे कुटीर पर पहुँचे, शांत और स्थिर।

Vorlag's voice came from the shadows.

वोरलाग ने शॉल उतार फेंका, उसकी आँखें दहक रही थीं। "मैं टुंड्रा की भूख हूँ, बच्ची। अंतहीन सर्दी का साकार रूप। वह यह समझ गई थी। अब, तुम भी समझोगी!" एलारा ने अपनी चाकू के लिए छलांग लगाई। "तुम मुझे नहीं ले जा पाओगी!" वह चिल्लाई।

एलारा को अपने पिता के सबक याद थे - जंगल का सम्मान करना और उससे डरना, लेकिन कभी भी उससे हार न मानना। जैसे ही भेड़िया झपटा, उसे याद आया कि उसके पिता ने उससे क्या कहा था। "हमेशा आँखों पर निशाना लगाओ।" उसने अपनी चाकू गहराई तक घुसाई, और वोरलाग दर्द से कराह उठा, लड़खड़ाते हुए पीछे हट गया। जंगल में सन्नाटा छा गया।

सर्दी का प्रकोप अभी भी जारी था, लेकिन एलारा अब डरी हुई नहीं थी। उसने अंधेरे का सामना किया था और जीवित बची थी। उसने अपनी दादी के काम को जारी रखकर उनकी याद का सम्मान किया। वह जानती थी कि जंगल में सुंदरता और खतरा दोनों हैं। जब आखिरकार टुंड्रा में वसंत आया, तो वह किसी भी याद किए गए वसंत से ज़्यादा गर्म था।