अडिग टिन सैनिक

एक रंगीन दुनिया में जहाँ समुद्र आकाश से मिलता था, एक अकेला燈स्तंभ खड़ा था, जो तारों की रोशनी से जीवित हुए खिलौनों का घर था। उनमें एक टिन का सिपाही था, जो अपनी अटूट नज़र और एक पैर से विशिष्ट था, जो सृजन की एक दुर्घटना थी। वह कमरे के पार कागज़ की बैलेरीना के लिए तरसता था, सुंदरता की एक ऐसी छवि जो हमेशा उसकी पहुँच से बाहर थी। उसे शायद ही पता था कि नियति ने उसके लिए और भी अशांत जल तैयार कर रखा था, जो उसके संकल्प की परीक्षा लेगा और उसके धातुई हृदय की गहराइयों को प्रकट करेगा, क्योंकि खिलौनों से परे की दुनिया, रंगीन समुद्र, उसे बुला रहा था।

पच्चीस के एक सेट से जन्मा, वह सबसे आखिर में ढाला गया था, साँचा कम पड़ गया था। वह लंबा खड़ा था, एक राइफल उसकी छाती से सटी हुई थी, एक पैर बाकी से छोटा था। "एक छोटी सी खामी," खिलौने बनाने वाले ने घोषणा की थी, फिर भी सिपाही ने अंतर महसूस किया। उसने दूसरे खिलौनों को अपनी रचना का जश्न मनाते देखा, लेकिन उसकी नज़र हमेशा बैलेरीना पर टिकी रहती थी, जो संतुलित और परिपूर्ण थी। "काश मैं उसके साथ नाच पाता," उसने आह भरी, उसकी धातुई आवाज़ मुश्किल से एक फुसफुसाहट थी।

हवा का एक झोंका, शरारती और चंचल, लाइटहाउस से होकर गुज़रा, खिड़कियों को खड़खड़ाता हुआ। "रुको!" टिन सैनिक चिल्लाया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। वह खिड़की की चौखट से गिर गया, नीचे अज्ञात में जा गिरा। वह एक झनझनाहट के साथ उतरा, अंधेरे में समा गया। "ऐसा लगता है," उसने अपनी गिरी हुई राइफल को ठीक करते हुए बुदबुदाया, "कि रोमांच ने मुझे ढूंढ लिया है, चाहे मैं उसे ढूंढ रहा था या नहीं।"

दो गली के बच्चों ने उसे धूल और गंदगी के बीच पाया। "देखो मुझे क्या मिला!" एक ने शरारती चमक के साथ कहा। "एक सिपाही!" दूसरा, जो बड़ा और अधिक चालाक था, उसे झपट लिया। "हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं," उसने घोषणा की। "वह नाली की धारा में एक भव्य जहाज चलाएगा।" उसने उसे एक कागज़ की नाव में बिठा दिया, एक खतरनाक यात्रा के लिए एक अस्थायी पोत।

कागज़ की नाव धारा की मर्ज़ी से उछलती और डोलती रही। उसने अज्ञात का सामना किया, उसका संकल्प अडिग था। एक चूहा, चिकना और ख़तरनाक, उसे परछाइयों से देख रहा था। "तुम घर से बहुत दूर हो, छोटे सिपाही," वह फुफकारा। "यह धारा समुद्र की ओर जाती है, एक अँधेरी और अंतहीन जगह।" निडर होकर, टिन के सिपाही ने अपनी राइफ़ल ठीक की। "जैसा कि सेनेका ने कहा था, 'हर नई शुरुआत किसी और शुरुआत के अंत से आती है।' मैं इसका सामना साहस के साथ करूँगा।"

नाव एक अँधेरी सुरंग में जा घुसी, जो समुद्र की ओर जाने वाली एक नाली थी। सिपाही को डर का एक झोंका महसूस हुआ, यह पहला डर था जो उसे अपने निर्माण के बाद से महसूस हुआ था। "यह अंत है," उसने सोचा, लेकिन वह डटा रहा। वह खुले पानी में बह गया, उसके सामने चित्रित समुद्र का विशाल विस्तार था। प्रकाशस्तंभ से आती रोशनी अब मुश्किल से दिखाई दे रही थी।

एक बड़ी मछली, जिसकी चमकती हुई खाल रंगीन आसमान को दर्शा रही थी, उसने नाव को पूरा निगल लिया। अँधेरा। ख़ामोशी। सिपाही ने ख़ुद को संभाला, उसका धातुई दिल ख़ाली जगह में गूँज रहा था। "कन्फ्यूशियस ने कहा था, 'इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप कितनी धीमी गति से चलते हैं, जब तक आप रुकते नहीं हैं'," उसने ख़ुद को याद दिलाया। "मुझे सहना होगा।"

एक मछुआरे ने मछली को समुद्र से बाहर निकाला, उसकी खाल सूरज में चमक रही थी। उसने उसे गोदी में ही काटा, और उसके अंदर की चीज़ें बाहर बिखर गईं। टिन का सिपाही लकड़ी के तख्तों पर गिरा, अचानक रोशनी में पलकें झपकाते हुए। एक महिला हाँफ उठी। "यह नहीं हो सकता!" वह चिल्लाई, अपने बचपन के खिलौने को पहचानते हुए। वह उसे घर ले गई।

वापस लाइटहाउस में, वह एक बार फिर बैलेरीना के सामने खड़ा था। महिला ने उसे सावधानी से मेज पर रखा, उसकी नज़र कभी उससे नहीं हटी। छोटी लड़की, लाइटहाउस कीपर की बेटी, खिलखिला उठी। "वे एक-दूसरे के लिए ही बने थे!" उसने कहा। वह सैनिक को बैलेरीना के करीब लाई, आमने-सामने। तब सैनिक समझ गया कि वह पूरी तरह से घूमकर वापस वहीं आ गया था।

गर्मी की एक अचानक चिंगारी, शायद एक दुर्घटना, ने खिलौनों को प्रज्वलित कर दिया। आग ने उन्हें, टिन के सिपाही और बैलेरीना को, नियति के एक अंतिम, अग्नि नृत्य में भस्म कर दिया। चित्रित समुद्र में, एक अकेला, धातु का दिल ऊपर की ओर तैर रहा था, तारों की रोशनी को दर्शाता हुआ, अटूट संकल्प का एक प्रमाण। जो सोना उसने कभी नहीं चाहा था, वह प्यार था जिसे उसने पाया और बन गया।